छत्तीसगढ़ में जमीन के इस्तेमाल के नियम बदले, अब आवासीय इलाकों में अस्पताल-स्कूल और ऑफिस को रास्ता

Ease of Doing Business को बढ़ावा देने सरकार का बड़ा कदम; Negative List Model लागू, औद्योगिक क्षेत्रों में हॉस्टल और श्रमिक आवास भी अनुमत्य
रायपुर, 8 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में शहरी विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए भूमि उपयोग के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन करते हुए भूमि उपयोग को अधिक सरल और लचीला बनाने के लिए Negative List Model लागू किया है।
इस बदलाव के बाद अब हर गतिविधि के लिए अलग-अलग अनुमति की जटिलता कम करने की दिशा में रास्ता खुला है। आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों में अस्पताल, स्कूल और कार्यालय जैसी गतिविधियों को अनुमति दी गई है, जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में हॉस्टल, डॉर्मिटरी और श्रमिक आवास जैसी सुविधाओं को भी अनुमत्य गतिविधियों में शामिल किया गया है।
क्या बदला?
नई व्यवस्था में किसी भूमि उपयोग श्रेणी में प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची तय की जाएगी। इसके अलावा अन्य गतिविधियों के लिए अपेक्षाकृत अधिक लचीलापन उपलब्ध होगा। सरकार का कहना है कि इससे भूमि उपयोग से जुड़े नियम अधिक स्पष्ट, सरल और व्यावहारिक होंगे।
इस मॉडल का उद्देश्य नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए अनुपालन संबंधी बोझ कम करना तथा बदलती आर्थिक और सामाजिक जरूरतों के मुताबिक शहरी भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
आवासीय इलाकों में स्कूल-अस्पताल और ऑफिस
संशोधित नियमों का सबसे महत्वपूर्ण असर आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों में दिखाई देगा। नई व्यवस्था के तहत अस्पताल और स्कूल जैसी जन-आवश्यक सुविधाओं को आवासीय एवं वाणिज्यिक भूमि उपयोग में अनुमति दी गई है।
इसी तरह कार्यालयों को भी इन भूमि उपयोग श्रेणियों में अनुमत्य किया गया है।
इसका उद्देश्य लोगों को घर के आसपास ही शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ाना है। इससे रोजाना लंबे आवागमन की जरूरत और यातायात के दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए बड़ी सुविधा
औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों और श्रमिकों को भी नए नियमों से राहत मिलने की उम्मीद है। संशोधित प्रावधानों के तहत हॉस्टल, डॉर्मिटरी और श्रमिक आवास जैसी सुविधाओं को अनुमति दी गई है।
इससे उद्योगों के आसपास कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था विकसित करने में आसानी होगी और कार्यस्थल तथा आवास के बीच की दूरी कम की जा सकेगी।
छत्तीसगढ़ को दो साल में मिले ₹885 करोड़
शहरी नियोजन सुधारों को लागू करने के लिए केंद्र सरकार की Special Assistance to States for Capital Investment (SASCI) योजना के तहत छत्तीसगढ़ को दो वर्षों में कुल ₹885 करोड़ की सहायता मिली है।
- 2024-25: ₹800 करोड़
- 2025-26: ₹85 करोड़
- कुल: ₹885 करोड़
राज्य सरकार के अनुसार, यह सहायता शहरी नियोजन सुधारों को आगे बढ़ाने से जुड़ी है।
त्रिपुरा, MP और राजस्थान की तर्ज पर बदलाव
भूमि उपयोग को सरल बनाने के लिए अपनाए गए Negative List Model की दिशा में छत्तीसगढ़ भी आगे बढ़ा है। सरकार के अनुसार त्रिपुरा, मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित अन्य राज्यों ने भी अपने Development Control Regulations में इस तरह की व्यवस्था अपनाई है।
छत्तीसगढ़ में इस मॉडल को लागू करने का उद्देश्य भूमि उपयोग संबंधी नियमों को अधिक आधुनिक, लचीला और विकासोन्मुख बनाना है।
सिर्फ उद्योग नहीं, नागरिक सुविधाओं पर भी फोकस
नए नियमों में आर्थिक गतिविधियों के साथ सामाजिक जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया है। मनोरंजन भूमि उपयोग श्रेणी में श्मशान और कब्रिस्तान से संबंधित आवश्यक गतिविधियों को भी अनुमत्य किया गया है।
यानी संशोधन का फोकस केवल निवेश और उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरों में रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों के मुताबिक भूमि उपयोग को अधिक व्यावहारिक बनाने पर भी है।
सरकार का फोकस—कम नियम, आसान कारोबार
राज्य सरकार का कहना है कि डीरिगुलेशन और Compliance Burden Reduction की दिशा में किए गए इन बदलावों से अनावश्यक नियामकीय जटिलताएं कम होंगी। इससे निवेशकों और उद्यमियों के लिए परियोजनाएं शुरू करना और भूमि का उपयोग करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किए गए इस सुधार को राज्य में निवेश का माहौल बेहतर करने और शहरी विकास को गति देने की पहल के तौर पर प्रस्तुत किया गया है।
नए भूमि उपयोग नियमों से आने वाले समय में मिश्रित भूमि उपयोग, नागरिक सुविधाओं, औद्योगिक अधोसंरचना और निवेश गतिविधियों के विस्तार के लिए ज्यादा गुंजाइश बनने की उम्मीद है।
